मौसम पूर्वानुमान: 20 दिसम्बर से 24 दिसम्बर तक की अवधि में आकाश में छाए रहेंगे हल्के बादल! कोल्ड डे की बनी रह सकती है स्थिति! किसानों के लिए दिया गया आवश्यक सुझाव

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समस्तीपुर।(मदन मोहन चौधरी): ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पुसा समस्तीपुर एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी शनिवार 20 दिसम्बर से 24 दिसम्बर 2025 तक के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार इस अवधि में उत्तर विहार के जिलों में आसमान में हल्के बादल रह सकते है, साथ ही इस दौरान मौसम के शुष्क रहने का अनुमान है।

सुबह में हल्के से मध्यम कुहासा छा सकता है। वायुमंडल के ऊपरी हिस्से से ठंडी हवा का प्रवेश तथा पछिया हवा के कारण कोल्ड डे की स्थिति बन गयी है, जिसके कारण देर सुबह तक घना कुहासा छा रहा है। यह स्थिति अगले 1-2 दिनों तक बने रहने की सम्भावना है, हालांकि 20 दिसंबर के बाद मौसम की स्थिति में सुधार होने का अनुमान है।

इस दौरान अधिकतम तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 12 से 13 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। मौसम के इस पूर्वानुमान की अवधि में औसतन 3-5 किमी/घंटा की रफ्तार से पछिया हवा चलने की संभावना है, हालांकि सोमवार 22 दिसंबर के आसपास पुरबा हवा के चलने की भी संभावना है। इस दौरान सुबह में सापेक्ष आर्द्रता 85 से 95 प्रतिशत तथा दोपहर में 35 से 45 प्रतिशत रहने की संभावना मौसम विभाग द्वारा बतायी जा रही है।

मौसम को देखते हुए किसान भाईयों के लिए सुझाव:-

मौसम विभाग ने कम तापमान एवं कोल्ड डे की स्थिति को देखते हुए किसानों के लिए आवश्यक सुझाव देते हुए कहा है कि, किसान भाई इस मौसम में अपने खेतों में उचित नमी बनाये रखें तथा नमी की कमी होने पर फसल की सिंचाई अवश्य करें। गेहूं की फसल में खर-पतवार नियंत्रण की सर्वाधिक उपयुक्त अवस्था बुआई के 30 से 35 दिन बाद मानी जाती है।

गेहूँ में उगने बाले चौड़ी पत्ती एवं संकरी पत्ती वाले सभी प्रकार के खर-पतवारों के प्रमादी नियंत्रण हेतु पहली सिंचाई के बाद सल्फोसल्फयुरॉन 23 ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा मेटसल्पयूरॉन 20 ग्राम प्रति हेक्टेयर की मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर, खड़ी फसल में छिडकाव कर सकते हैं।

छिड़काव के दौरान विशेष ध्यान देने की बात बताते हुए उन्होंने कहा कि, छिड़काव के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना जरूरी है, ताकि दवा का असर बेहतर हो सके।टमाटर की फसल में फल छेदक कीट की नियमित निगरानी करने की बात भी विभाग ने बताया है।

उन्होंने कहा कि, इस कीट के पिल्लू कच्चे एवं पके दोनों प्रकार के फलों में छेद कर उनके अंदर घुस जाते है, और टमाटर के गूदे को खाते हैं। जिससे फल सड़ने लगता है जिससे उत्पादन में भारी कमी आती है। इस कीट की रोकथाम के लिए प्रति हेक्टेयर 8-10 फेरोमोन ट्रेप खेत में लगाने की बात कही।

(डॉ० ए. सत्तार) नोडल पदाधिकारी

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