हरियाणा। हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUST) ने बाल अधिकार और बाल संरक्षण को अकादमिक ढांचे में संस्थागत रूप देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) के साथ समझौता कर इन विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है।

इस समझौते के तहत अब विश्वविद्यालय में स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा स्तर पर बाल अधिकार व बाल संरक्षण से जुड़े कोर्स शुरू किए जाएंगे। साथ ही दोनों संस्थाएं मिलकर इन विषयों पर शोध कार्य भी करेंगी।
सी-लैब, जिसे इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन ने स्थापित किया है, देश के बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। यह संस्था 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के साथ मिलकर बाल अधिकारों की सुरक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही है।
समझौते के अनुसार, सी-लैब विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक सामग्री, अवधि और पात्रता तय करेगा और विश्वविद्यालय को तकनीकी व विशेषज्ञ सहयोग भी प्रदान करेगा। वहीं, विश्वविद्यालय अपने सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन के माध्यम से इन कोर्सों को शुरू करने के लिए आवश्यक नीतिगत फैसले लेगा और परिसर में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ऐसे जागरूक और संवेदनशील युवाओं की पीढ़ी तैयार करना है, जो बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी योगदान दे सके। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी विश्वविद्यालय को इस क्षेत्र में एक मजबूत ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
वहीं, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. संगीता गौड़ ने इस पहल को जमीनी अनुभव और अकादमिक शोध के बीच की दूरी कम करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य के पेशेवर बाल विवाह, बाल मजदूरी, बाल तस्करी और ऑनलाइन सुरक्षा जैसे मुद्दों को अधिकार-आधारित दृष्टिकोण से समझ सकेंगे।
इस समझौते पर कुलपति प्रो. बिश्नोई और इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के ट्रस्टी रजत कुमार ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. विजय कुमार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के डीन प्रो. ओ.पी. सांगवान भी उपस्थित रहे।
करीब 372 एकड़ में फैले इस विश्वविद्यालय में वर्तमान में 52,000 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने इसे A+ ग्रेड प्रदान किया है, जबकि नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2025 में इसे देश के शीर्ष 50 विश्वविद्यालयों में शामिल कर चुका है।
इस बीच, सी-लैब ने बाल यौन शोषण मामलों में ‘सपोर्ट पर्सन्स’ के लिए सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किया है, जिसकी मांग सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले के बाद बढ़ी है, जिसमें ऐसे मामलों में सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति अनिवार्य की गई है। मौके पर कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई और ट्रस्टी रजत कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।







