अरविन्द कुमार (संपादक)
गुरुग्राम। बाल अधिकार, व्यवहार विज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य को अकादमिक ढांचे में मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए Amity University Haryana और India Child Protection के शोध प्रभाग सी-लैब (Center for Legal and Behavior Change for Children) के बीच समझौता हुआ है। इस साझेदारी का उद्देश्य बाल संरक्षण क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान करना है।

समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर विभिन्न सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करेंगे, जिनके लिए पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री भी तैयार की जाएगी। साथ ही, बाल संरक्षण से जुड़े विषयों पर शोध और विशेषज्ञता विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
इस अवसर पर इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की कार्यकारी निदेशक Dr. Sampurna Behura ने कहा कि यह साझेदारी अकादमिक ज्ञान और जमीनी अनुभव के बीच की खाई को पाटने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े पेशेवरों के लिए व्यवहारिक अनुभव और विशेषज्ञता बेहद जरूरी है, जिसे यह पहल मजबूत करेगी।
वहीं एमिटी यूनिवर्सिटी हरियाणा के प्रो वाइस चांसलर Dr. Vikas Madhukar ने इसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से बाल संरक्षण और व्यवहार परिवर्तन को व्यावहारिक रूप में लागू करने में मदद मिलेगी।
इस समझौते के तहत सी-लैब पाठ्यक्रम निर्माण, शोध और जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन करेगा, जबकि एमिटी यूनिवर्सिटी अकादमिक सहयोग, अध्ययन सामग्री के अनुवाद और कार्यक्रमों के आयोजन में भागीदारी निभाएगी।
विशेष रूप से, विश्वविद्यालय सी-लैब के ‘सपोर्ट पर्सन’ सर्टिफिकेट कोर्स को मान्यता भी देगा। यह कोर्स बाल यौन शोषण के मामलों में सहायता करने वाले व्यक्तियों के लिए तैयार किया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में Supreme Court of India के निर्देश के बाद ऐसे मामलों में ‘सपोर्ट पर्सन’ की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है।
इस पहल से बाल संरक्षण क्षेत्र में प्रशिक्षित और संवेदनशील मानव संसाधन तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों को और मजबूती मिलेगी।







